14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा : सीआईडी-रांची पुलिस का आयोग में छापा, अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
झारखंड लोक सेवा आयोग की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। सीआईडी और रांची पुलिस ने संयुक्त रूप से JPSC कार्यालय समेत कुल आठ स्थानों पर मंगलवार को छापेमारी की। जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्रा. लि. (टीडीपीएल) के ठिकानों को भी खंगाला गया। इस कार्रवाई में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित डेटा एंट्री, प्रोग्रामिंग और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही, टीडीपीएल के कार्यालय को सील कर दिया गया। इसी बीच आयोग के चेयरमैन एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया। जिसे राज्यपाल संतोष गंगवार ने स्वीकार कर लिया।
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डिजिटल फॉरेंसिक जांच तेज, सीएम कर रहे मॉनिटरिंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक जारी रही, जिसमें JPSC कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेजों और कंप्यूटर डेटा को जब्त किया गया। टीडीपीएल से जुड़े रिकॉर्ड्स की भी गहन पड़ताल की गई, जिससे कई अहम डिजिटल साक्ष्य हाथ लगने की बात कही जा रही है। राज्य सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जब्त सामग्री की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है। पूरे घटनाक्रम की निगरानी खुद हेमंत सोरेन कर रहे हैं, जबकि छापेमारी की कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना जताई गई है।
उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ के बाद घर की तलाशी
जांच के दौरान सीआईडी टीम ने सबसे पहले उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ की। इसके बाद उन्हें वर्धमान कंपाउंड स्थित उनके आवास ले जाकर तलाशी ली गई। वहां से लौटने के बाद टीम उन्हें फिर JPSC कार्यालय लेकर पहुंची, जहां दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई। बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। छापेमारी के दौरान पूरे JPSC कार्यालय की घेराबंदी कर दी गई थी और किसी भी व्यक्ति को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है और मामले को लेकर लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं।
जांच के घेरे में एजेंसी, कई गंभीर सवाल खड़े
जांच के दायरे में परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े अधिकारी शामिल हैं। इनमें मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, सत्यपाल सिंह, रामबीर सिंह समेत अन्य तकनीकी कर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। सीआईडी डिजिटल टैंपरिंग, ओएमआर शीट में फेरबदल, मनी लॉन्ड्रिंग और एजेंसी के चयन की प्रक्रिया जैसे अहम बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है। इससे पहले 20 जून 2026 को सहायक लोक अभियोजक परीक्षा और 2 जुलाई 2026 को 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद गहराया था, जब आयोग के सदस्यों ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं करने और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को जिम्मेदारी देने जैसे मुद्दों ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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