झारखंड के सरकारी स्कूलों में नए सिरे से बनेंगे विद्यालय प्रबंधन समिति, महिलाओं की 50% भागीदारी अनिवार्य
झारखंड के सरकारी विद्यालयों में अब विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का गठन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत एसएमसी में सदस्यों की संख्या विद्यालय में नामांकित छात्रों के आधार पर तय होगी, जिसमें न्यूनतम 15 और अधिकतम 25 सदस्य शामिल होंगे। पहले यह संख्या 16 निर्धारित थी। साथ ही समिति का कार्यकाल तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष कर दिया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि समिति में महिलाओं, विशेषकर माताओं की भागीदारी कम से कम 50 प्रतिशत अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष में से एक पद पर महिला का होना भी जरूरी होगा। प्रधानाध्यापक को समिति का सदस्य सचिव बनाया जाएगा, जबकि अध्यक्ष का चयन अभिभावकों में से किया जाएगा।

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35 हजार विद्यालयों में गठन के निर्देश
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के करीब 35 हजार विद्यालयों में नई एसएमसी के गठन को लेकर सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों के संचालन में अभिभावकों, स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके। नई व्यवस्था के तहत समिति में अभिभावकों को प्रमुख प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। साथ ही महिलाओं, वंचित वर्गों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। एसएमसी बच्चों के नामांकन बढ़ाने, नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, ड्रॉपआउट रोकने, मध्याह्न भोजन की निगरानी तथा विद्यालय विकास योजना तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अहम भूमिका निभाएगी।

प्राथमिक से प्लस टू तक एक ही समिति
नई व्यवस्था के अनुसार अब प्राथमिक से लेकर प्लस टू विद्यालयों तक एक ही प्रकार की विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। पहले प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में एसएमसी तथा हाईस्कूल व प्लस टू विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति अलग-अलग होती थी। इसके अलावा एसएमसी के भीतर दो उपसमितियों का गठन भी किया जाएगा-भवन समिति और शिक्षा समिति। भवन समिति विद्यालय भवन, पेयजल, शौचालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं के रखरखाव पर ध्यान देगी, जबकि शिक्षा समिति पठन-पाठन की गुणवत्ता, बच्चों के सीखने के परिणाम और शिक्षकों के सहयोग से जुड़े मामलों पर फोकस करेगी। 500 से अधिक नामांकन वाले विद्यालयों में अधिकतम 25 सदस्यों की समिति बनेगी।
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