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Vinoba Bhave University की लापरवाही : अब तक शुरू नहीं हुआ बीएड कॉलेजों के एफिलिएशन- एफिलिएशन एक्सटेंशन प्रक्रिया

Vinoba Bhave University की लापरवाही : अब तक शुरू नहीं हुआ बीएड कॉलेजों के एफिलिएशन- एफिलिएशन एक्सटेंशन प्रक्रिया

विनोबा भावे विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बीएड कॉलेजों को समय पर एफिलिएशन और एफिलिएशन एक्सटेंशन देने में विश्वविद्यालय की लापरवाही और उदासीनता उजागर हुई है। अस्थायी मान्यता प्राप्त कॉलेजों को हर सत्र से पहले एक्सटेंशन लेना होता है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर प्रक्रिया में देरी के कारण यह समय पर नहीं हो पा रहा है। इस मामले को लेकर Supreme Court of India ने कॉलेज, विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है, ताकि विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन तय समयसीमा का पालन कराने में सुस्त नजर आ रहा है।

समयसीमा तय, फिर भी निरीक्षण प्रक्रिया अधूरी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कॉलेजों को 12 मार्च तक आवेदन देना था, जबकि 20 मार्च तक विश्वविद्यालय को निरीक्षण कर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य है। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय से संबद्ध 25 बीएड कॉलेजों में केवल चार को ही स्थायी मान्यता प्राप्त है, जबकि शेष कॉलेजों को हर सत्र में एक्सटेंशन लेना होता है। कई कॉलेजों ने निरीक्षण शुल्क के साथ आवेदन भी जमा कर दिया है, लेकिन 17 मार्च तक कई संस्थानों के लिए निरीक्षण टीम का गठन ही नहीं हो पाया है। ऐसे में निर्धारित समयसीमा के भीतर निरीक्षण, रिपोर्ट तैयार करना और प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना मुश्किल नजर आ रहा है। प्रक्रिया के तहत निरीक्षण टीम रिपोर्ट तैयार कर विश्वविद्यालय को सौंपती है, जिस पर एफिलिएशन कमेटी और सिंडिकेट की बैठक में निर्णय लेकर आगे भेजा जाता है।

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प्रशासन का दावा- जल्द पूरी होगी प्रक्रिया

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को लेकर सफाई दी है। रजिस्ट्रार डॉ. प्रणिता ने कहा कि जिन कॉलेजों ने पहले आवेदन किया था, उनकी जांच पूरी कर ली गई है और रिपोर्ट भी मिल चुकी है। कुछ कॉलेजों ने अंतिम समय में आवेदन किया, जिसके कारण निरीक्षण में देरी हुई है। जल्द ही सभी कॉलेजों की जांच प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार को 30 मार्च तक प्रस्ताव पर टिप्पणी करनी होती है और 10 मई तक अंतिम एफिलिएशन जारी करना होता है। इसी के बाद कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया शुरू होती है। ऐसे में देरी का सीधा असर छात्रों के नामांकन और पूरे शैक्षणिक सत्र पर पड़ सकता है।

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