रांची यूनिवर्सिटी का कारनामा : मई में ली परीक्षा, अब जांची जा रही कॉपियां, राजभवन का आदेश भी नहीं माना
नए साल की शुरुआत जहां झारखंड में जश्न और उम्मीदों के साथ हुई है, वहीं रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) के करीब 30 हजार छात्र निराशा और चिंता में डूबे हैं। स्नातक (कला, विज्ञान और वाणिज्य) सेकेंड सेमेस्टर सत्र 2023-27 का रिजल्ट परीक्षा के सात महीने बाद भी घोषित नहीं हो सका है। मई 2025 में परीक्षा होने के बावजूद अब जाकर दिसंबर/जनवरी में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू हुआ है। इस देरी ने छात्रों के शैक्षणिक सत्र, पढ़ाई और करियर तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिजल्ट में देरी की सबसे बड़ी वजह विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार करीब 69 हजार उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा विभाग में ही पड़ी रह गई थीं, जिन्हें मूल्यांकन के लिए भेजना प्रशासन भूल गया। परीक्षा के बाद अधिकांश कॉपियां दूसरे राज्य भेज दी गई थीं, लेकिन शेष कॉपियों को जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया पूरी ही नहीं की गई। दिसंबर में जब यह मामला उजागर हुआ, तब आनन-फानन में राम लखन सिंह यादव कॉलेज में मूल्यांकन केंद्र बनाया गया।
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7 जनवरी तक मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार फिलहाल मूल्यांकन कार्य तेजी से चल रहा है और 7 जनवरी 2026 तक सभी विषयों की कॉपियां जांचने का लक्ष्य रखा गया है। मूल्यांकन केंद्र के निदेशक डॉ. विष्णु चरण महतो ने बताया कि 2 जनवरी को जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की एक ट्रक खेप विश्वविद्यालय भेज दी गई है। विश्वविद्यालय के अनुसार रेगुलर के 12 विषय और वोकेशनल के 11 विषय, कुल 23 विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। मूल्यांकन पूरा होते ही रिजल्ट जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
सेकेंड सेमेस्टर का रिजल्ट नहीं आने से थर्ड और फोर्थ सेमेस्टर की पढ़ाई और परीक्षा दोनों प्रभावित होंगी। इससे पूरा सत्र 2023-27 और पीछे खिसक सकता है। लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र और उनके अभिभावक मानसिक तनाव में हैं। पढ़ाई का मनोबल कमजोर पड़ रहा है और छात्रों में भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है। खासकर फाइनल ईयर के छात्रों के लिए यह देरी ज्यादा घातक साबित हो सकती है।
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राजभवन के आदेश की अनदेखी, उठे सवाल
राजभवन की ओर से पहले ही स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि किसी भी परीक्षा का रिजल्ट एक माह के भीतर घोषित किया जाए, ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो। इसके बावजूद रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन समय पर मूल्यांकन नहीं करा सका। नतीजतन, करीब 30 हजार छात्रों को सात महीने से रिजल्ट का इंतजार करना पड़ रहा है। शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और छात्र अब जल्द रिजल्ट जारी होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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