यूपीएससी रिजल्ट में झारखंड का दम: सुदीपा 41वीं रैंक के साथ राज्य में नंबर वन, यहां पढ़ें सफलता की कहानी
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा-2025 का परिणाम घोषित कर दिया। इस बार परीक्षा में देशभर के साथ झारखंड के अभ्यर्थियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। राज्य से एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। खास बात यह रही कि महिला दिवस (8 मार्च) से पहले झारखंड की बेटियों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहरा दिया। अब तक मिली जानकारी के अनुसार राज्य के टॉप तीनों स्थानों पर लड़कियों ने कब्जा जमाया है। दुमका की सुदीपा दत्ता ने 41वां रैंक हासिल कर झारखंड टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है। वहीं बोकारो की अपूर्वा वर्मा 42वां रैंक लाकर राज्य की सेकेंड टॉपर बनी हैं, जबकि बोकारो की ही तेजस्विनी सिंह ने 62वां रैंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। राज्य के टॉप टेन में पांच स्थानों पर लड़कियों का दबदबा रहा, जिससे झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल है।

सफलता संघर्ष और समर्पण की मिसाल
दुमका निवासी सुदीपा दत्ता की सफलता संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। उनके पिता सच्चिदानंद दत्ता डाकघर में पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत हैं। सुदीपा इससे पहले झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से सीडीपीओ पद के लिए भी चयनित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी तैयारी दुमका के राजकीय पुस्तकालय में बैठकर की। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले वह एक बार इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन कुछ अंकों से अंतिम सूची में जगह नहीं बना पायी थीं। सुदीपा की इस सफलता से उनके परिवार और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। वहीं बोकारो की अपूर्वा वर्मा ने 42वां रैंक लाकर आईएएस में जगह बनायी, जबकि तेजस्विनी सिंह ने 62वां रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया।
राज्य के कई जिलों से अभ्यर्थी सफल, युवाओं के लिए बने प्रेरणा
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2025 में झारखंड के विभिन्न जिलों से कई अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। लातेहार के बिपुल गुप्ता ने 103वां रैंक प्राप्त किया, जबकि बाघमारा के शुभम महतो को 142वां रैंक मिला। राजधानी रांची की बहू ईशा जैन ने 272वां रैंक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया, जबकि मो. इश्तियाक रहमान को 354वां रैंक प्राप्त हुआ। इसके अलावा साहिबगंज की निहारिका ने 365वां और हजारीबाग की श्रुति मोदी ने 569वां रैंक हासिल किया। अधिकांश सफल अभ्यर्थियों ने कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ परीक्षा की तैयारी की। कई अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन संसाधनों का सहारा लिया, जबकि कुछ ने नौकरी के साथ तैयारी जारी रखी। इन युवाओं की सफलता झारखंड के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आयी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सफल अभ्यर्थियों को बधाइयों का सिलसिला जारी है।
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यहां पढ़ें सफलता की कहानी

दुमका की सुदीपा को तीसरे प्रयास में मिली कामयाबी
दुमका निवासी सुदीपा दत्ता की सफलता संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। उनके पिता सच्चिदानंद दत्ता डाकघर में पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत हैं। सुदीपा इससे पहले झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से सीडीपीओ पद के लिए भी चयनित हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी तैयारी दुमका के राजकीय पुस्तकालय में बैठकर की। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले वह एक बार इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन कुछ अंकों से अंतिम सूची में जगह नहीं बना पायी थीं। सुदीपा की इस सफलता से उनके परिवार और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

पिता दर्जी, मां नर्स: साहिबगंज की निहारिका को मिला 365वां रैंक
साहिबगंज की होनहार बेटी निहारिका सिन्हा ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 365वां रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। निहारिका को यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में मिली है। उन्होंने वर्ष 2024 में पहली बार परीक्षा दी थी, जबकि दूसरे प्रयास में उन्होंने यह उपलब्धि प्राप्त कर ली। निहारिका साहिबगंज के कुलीपाड़ा की रहने वाली हैं। उनके पिता निरंजन सिन्हा पेशे से दर्जी हैं और माता शबनम कुमारी स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर नर्स के रूप में कार्यरत हैं। साधारण परिवार से आने वाली निहारिका ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। निहारिका की प्रारंभिक शिक्षा साहिबगंज में ही हुई। उन्होंने वर्ष 2018 में संत जेवियर स्कूल, साहिबगंज से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह रांची गईं और वर्ष 2020 में जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली से 12वीं पास की। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद निहारिका ने कोलकाता का रुख किया और संत जेवियर्स कॉलेज से राजनीति शास्त्र विषय में स्नातक की पढ़ाई की। उन्होंने वर्ष 2023 में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

लातेहार के बिपुल गुप्ता को आया है 103वां रैंक
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव निवासी बिपुल गुप्ता ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 2025 के घोषित परिणामों में देशभर में 103वां रैंक हासिल किया है। बिपुल वर्तमान में विशाखापट्टनम में इस्पात कंपनी में कार्यरत डिस्ट्रिक्ट जनरल मैनेजर पवन गुप्ता के बड़े पुत्र हैं। उनकी इस सफलता से गांव और जिले में खुशी का माहौल है। बिपुल गुप्ता ने इससे पहले भी यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। पिछले वर्ष उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की थी, लेकिन रैंक 300 से अधिक होने के कारण वे आईएएस बनने से चूक गए थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी जारी रखी। इसी दौरान उन्होंने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया था। पिछले वर्ष आयोजित आईएफएस परीक्षा में बिपुल ने पूरे देश में 12वां स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि के बाद वे वर्तमान में भारतीय वन सेवा में कार्यरत हैं। अब यूपीएससी 2025 के परिणाम में 103वां रैंक हासिल कर बिपुल गुप्ता ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। उनके दादा जयप्रकाश गुप्ता, पिता पवन कुमार गुप्ता और माता दीपा गुप्ता ने उनकी सफलता पर गर्व जताया है।
बाघमारा के शुभम महतो को यूपीएससी में 142वां रैंक
बाघमारा (धनबाद) के रहने वाले शुभम कुमार महतो ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 142वां रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अपनी सफलता को लेकर शुभम का कहना है कि जीवन में कामयाबी के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि लगातार मेहनत और लगन ही असली रास्ता है। 28 वर्षीय शुभम बाघमारा क्षेत्र के जमुआटांड़, डुमरा के निवासी हैं। उनके पिता हीरालाल महतो बीसीसीएल में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता मंजू देवी गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाले शुभम ने अपनी पढ़ाई और कड़ी मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। शुभम की प्रारंभिक शिक्षा बोकारो के डीपीएस से हुई। इसके बाद उन्होंने वाराणसी स्थित बीएचयू से माइनिंग इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल भी हासिल किया। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद शुभम ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। निरंतर प्रयास और समर्पण के साथ उन्होंने परीक्षा की तैयारी जारी रखी और आखिरकार सिविल सेवा परीक्षा में 142वां रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और इलाके में खुशी का माहौल है।
बोकारो की तेजस्विनी को पहले ही प्रयास में मिला 62वां रैंक
बोकारो की होनहार बेटी तेजस्विनी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 62वां रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि तेजस्विनी ने यह सफलता अपने पहले ही प्रयास में प्राप्त की है, जिससे परिवार और शहर में खुशी का माहौल है। तेजस्विनी बोकारो इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक प्रभारी (एमआरडी) राजेश कुमार की पुत्री हैं। उनकी माता डॉ. पल्लवी प्रवीण बीएस सिटी कॉलेज में वनस्पति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष हैं। शिक्षा और प्रेरणा से भरे माहौल में पली-बढ़ी तेजस्विनी ने अपनी मेहनत और समर्पण से यह मुकाम हासिल किया है। तेजस्विनी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई झारखंड के प्रतिष्ठित संस्थान बीआईटी मेसरा से पूरी की है। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और उसी दिशा में तैयारी शुरू कर दी। लगन और अनुशासन के साथ की गई तैयारी का परिणाम रहा कि तेजस्विनी ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि से बोकारो सहित पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।
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आईपीएस अपूर्वा वर्मा बनीं आईएएस, यूपीएससी में हासिल किया 42वां रैंक
बोकारो इस्पात संयंत्र के यातायात विभाग के सेवानिवृत्त कर्मी अजीत कुमार प्रसाद वर्मा और गृहिणी आभा वर्मा की पुत्री अपूर्वा वर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 42वां रैंक हासिल कर बड़ी सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि के साथ ही अपूर्वा अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के लिए चयनित हो गई हैं। अपूर्वा वर्मा ने मणिपुर स्थित एनआईटी से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। पढ़ाई के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और लगातार प्रयास करते हुए सफलता की ओर बढ़ती रहीं। वर्ष 2020 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की थी। हालांकि उस समय उनका नाम यूपीएससी की रिजर्व लिस्ट में शामिल हुआ था। इसके बाद उन्हें डीएएनआईपीएस (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा) कैडर आवंटित किया गया। इसी के तहत वे पुलिस सेवा में कार्यरत रहीं। आईपीएस सेवा में रहते हुए भी अपूर्वा ने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और दोबारा सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुईं। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने इस बार 42वां रैंक हासिल किया और आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया। उनकी इस सफलता से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
हजारीबाग की श्रुति मोदी को यूपीएससी में 569वां रैंक
हजारीबाग की श्रुति मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 569वां रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि श्रुति ने बैंक में नौकरी करते हुए ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और सफलता प्राप्त की। श्रुति मोदी के पिता सीताराम मोदी और माता सुषमा मोदी हैं। उनका पैतृक गांव हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड का जमशौती है, जबकि उनका ननिहाल धनबाद जिले के हरिणा बाघमारा में है। उनकी सफलता से परिवार और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल है। श्रुति ने दिल्ली स्थित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की है। पढ़ाई के बाद उन्होंने बैंक में क्लर्क के रूप में नौकरी शुरू की। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं। अपनी सफलता को लेकर श्रुति का कहना है कि नियमित और एकाग्र होकर पढ़ाई करने से सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। मेहनत और धैर्य के साथ की गई तैयारी से लक्ष्य जरूर हासिल किया जा सकता है।
सफल होने वालो में 659 पुरुष और 299 महिलाएं
इस बार कुल 958 उम्मीदवारों (659 पुरुष और 299 महिलाएं) ने परीक्षा में सफलता हासिल की है. उन्हें विभिन्न केंद्रीय सिविल सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया है. 348 अनुशंसित उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को अस्थायी रखा गया है. सफल उम्मीदवारों में इनमें 42 दिव्यांग, 258 अन्य आरक्षित, 317 सामान्य और 104 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से. 306 ओबीसी, 158 एससी और 73 एसटी श्रेणिया से हैं।
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