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झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में होगी जर्मन-जापानी सहित विदेशी भाषाओं की पढ़ाई, IIT खड़गपुर के साथ किया MOU

झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी में होगी जर्मन-जापानी सहित विदेशी भाषाओं की पढ़ाई, IIT खड़गपुर के साथ किया MOU

रांची स्थित झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जेयूटी) ने उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कुलपति प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह की पहल पर जेयूटी ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान सीईटी, आईआईटी खड़गपुर के साथ शैक्षणिक करार (एमओयू) किया है। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय भाषाओं के साथ-साथ जर्मन और जापानी जैसी विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा के साथ भाषा कौशल को भी मजबूत करना है, ताकि छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। जेयूटी प्रशासन का मानना है कि यह करार राज्य के तकनीकी संस्थानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में नया आयाम जोड़ेगा।

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सिलेबस, कोर्स मॉड‌ल और एकेडमिक कॉर्डिनेशन पर चर्चा

एमओयू को धरातल पर उतारने के लिए सीईटी, आईआईटी खड़गपुर की आठ सदस्यीय टीम जेयूटी पहुंची। टीम का नेतृत्व डॉ. एच. बनर्जी और थॉमस कर रहे थे। इस दौरान जेयूटी के सिलेबस निदेशक, कोर्स को-ऑर्डिनेटर, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रकों के साथ विस्तृत बैठक हुई। बैठक में नए भाषा पाठ्यक्रमों की संरचना, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन प्रणाली और अकादमिक समन्वय जैसे बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि इन भाषा पाठ्यक्रमों के साथ-साथ एनपीटीईएल (नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी एनहैंस्ड लर्निंग) के कोर्सेज को जेयूटी में और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि छात्र आईआईटी स्तर की तकनीकी शिक्षा और ऑनलाइन लर्निंग का लाभ उठा सकें।

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रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अवसरों का खुलेगा रास्ता

जेयूटी प्रशासन का मानना है कि विदेशी भाषाओं की पढ़ाई से छात्रों के लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के नए द्वार खुलेंगे। जर्मन और जापानी भाषा का ज्ञान इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर में मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम करने के अवसर बढ़ाएगा। अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स और विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए भी छात्र बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे। कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल झारखंड के छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें स्किल-बेस्ड और ग्लोबल एजुकेशन से जोड़ेगी। आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर राज्य की तकनीकी शिक्षा और रोजगार पर साफ दिखेगा।

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