ब्रिजकोर्स मॉड्यूल से ड्रॉप आउट होगा कम, CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में 25 नवंबर तक 10वीं-12वीं का सिलेबस पूरा करने का निर्देश
आउट ऑफ स्कूल और ड्रॉप आउट बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने के लिए राज्य में खास ब्रिज कोर्स मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से 11 से 14 नवंबर तक झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला शुरू होने से पहले सोमवार को राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें विभिन्न गैर सरकारी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सेवानिवृत शिक्षक और कक्षा 1 से 8 तक के रिसोर्स शिक्षक शामिल हुए।
ब्रिज कोर्स को तीन अलग हिस्सों में तैयार किया जा रहा है ताकि बच्चों की जरूरत के अनुसार सामग्री बनाई जा सके। कक्षा 1-2, कक्षा 3-5 और कक्षा 6-8 के लिए अलग-अलग मॉड्यूल तैयार होंगे। इससे पहले JCERT के संकाय सदस्यों और नामित शिक्षकों द्वारा 4-4 दिवसीय कार्यशालाएं कर मॉड्यूल की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है।
इस पूरे काम में UNICEF तकनीकी और वित्तीय मदद दे रहा है। इसके अलावा सिनी टाटा ट्रस्ट, प्रथम और रूम टू रीड जैसे संस्थान भी सहयोग कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह कोर्स उन बच्चों के लिए बेहद अहम है जिनकी बुनियादी सीखने की क्षमता कक्षा स्तर से कम है या जो किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुके हैं। यह मॉड्यूल उन्हें फिर से पढ़ाई की नियमित प्रक्रिया में आने का मौका देगा।
मॉड्यूल को बनाया जा रहा और अधिक प्रभावी
सरकार का मानना है कि बुनियादी सीखने में कमजोरी होने पर बच्चों के लिए कक्षाओं को समझ पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे बच्चों को ब्रिज कोर्स के जरिए फिर से मजबूत आधार देकर आगे की पढ़ाई के लायक बनाया जाएगा। चार दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों की टीम मॉड्यूल को और सुव्यवस्थित व प्रभावी बनाने पर काम करेगी। यह पहल राज्य में बच्चों की सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने और उन्हें स्कूल से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्यों को निर्देश
राज्यभर के सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रबंधकों के साथ भी सोमवार को अहम बैठक हुई। बैठक में सभी विद्यालयों को निर्देश दिया गया कि वे 17 नवंबर तक समिटिव असेसमेंट-1 (SA-1) का डिजिटल रिपोर्ट कार्ड तैयार कर लें। इसके साथ ही क्लास 10 और 12 का पूरा सिलेबस 25 नवंबर तक हर हाल में पूरा करने को कहा गया है।
स्कूलों को SA-1 के रिजल्ट का पूरा डेटा मंगलवार शाम तक राज्य को भेजना अनिवार्य है। इस पर आगे की समीक्षा 14 नवंबर को विभागीय सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में की जाएगी। बैठक में अधिकारियों ने साफ कहा कि इस साल सभी स्कूल 100 प्रतिशत पासिंग रिजल्ट के लक्ष्य के साथ काम करें। सिलेबस पूरा कराने की जवाबदेही सीधे-सीधे प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रबंधकों की होगी।
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