सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड की नॉन-टीचिंग परीक्षा में विवाद, आजसू ने रद्द करने और न्यायिक जांच की उठाई मांग
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में आयोजित नॉन-टीचिंग नियुक्ति परीक्षा एक बार फिर विवादों में है। आजसू ने इस परीक्षा को भ्रष्टाचार और मिलीभगत का परिणाम बताते हुए तुरंत रद्द करने तथा स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई है। आजसू का आरोप है कि एनटीए द्वारा पहले कराई गई परीक्षा को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अचानक रद्द कर दिया। इसके बाद निजी एजेंसी से पुनः परीक्षा कराई गई, जिसकी प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध रही। संघ ने कहा कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ यह खुला खेल चल रहा है और साजिश उजागर होने पर कई बड़े नाम सामने आएंगे।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी, हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम प्रश्न
आजसू ने दावा किया कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र खुले लिफाफों में A4 शीट पर बांटे गए, जिन पर सुरक्षा का कोई चिह्न नहीं था। यह भी आरोप लगाया गया कि हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को तीन प्रश्न कम मिले, जिससे उनके साथ सीधा-सीधा अन्याय हुआ है। संघ ने कुलपति की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि परीक्षा के दिन वे अनुपस्थित थे, जबकि इस भर्ती पर पहले से हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर जारी है। आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने इसे “युवाओं के करियर के साथ धोखा” बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया को तत्काल रद्द कर न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।
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चेरी-मनातू परिसर में दो पालियों में हुई परीक्षा, 1550 ने किया आवेदन
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षकेतर कर्मचारी चयन परीक्षा-2025 (सीयूजे एनटीआर-2025) का आयोजन चेरी-मनातू परिसर में किया गया। कुल 33 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में करीब 1550 अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया था। परीक्षा दो पालियों में सुचारू रूप से आयोजित हुई, जिसमें अभ्यर्थियों ने अपने उत्तर ओएमआर शीट पर भरे। जिन पदों के लिए परीक्षा ली गई, उनमें टेक्निकल असिस्टेंट, सिक्योरिटी इंस्पेक्टर, यूडीसी, लेबोरेटरी असिस्टेंट, लाइब्रेरी असिस्टेंट, एलडीसी, एलडीसी (जी एंड एच), ड्राइवर, लेबोरेटरी अटेंडेंट, लाइब्रेरी अटेंडेंट और हॉस्टल अटेंडेंट शामिल हैं।
आजसू ने कुलाधिपति, यूजीसी और मंत्रालय से की सख्त कार्रवाई की मांग
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आजसू ने कुलाधिपति, शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी से हस्तक्षेप की अपील की है। संघ का कहना है कि यदि पारदर्शी जांच कराई जाए तो परीक्षा प्रक्रिया में शामिल कई जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका सामने आ जाएगी। आजसू ने परीक्षा को तुरंत रद्द करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग दोहराई है। संघ ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन भी कर सकते हैं, ताकि युवाओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
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