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यहां पढ़ें NEET पर बढ़ते विवादों की पूरी टाइमलाइन: भरोसे के संकट में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा

यहां पढ़ें NEET पर बढ़ते विवादों की पूरी टाइमलाइन: भरोसे के संकट में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा

देश के लाखों छात्रों के भविष्य का निर्धारण करने वाली NEET परीक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 2026 में परीक्षा रद्द होने और जांच एजेंसियों की एंट्री के बाद यह साफ हो गया है कि यह केवल एक साल की समस्या नहीं, बल्कि वर्षों से चल रही खामियों का परिणाम है। पिछले एक दशक में इस परीक्षा को लेकर भाषा विवाद, पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था, तकनीकी गड़बड़ी और ग्रेस मार्क्स जैसे कई मुद्दे सामने आए हैं। इन घटनाओं ने न केवल परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के भरोसे को भी गहरा झटका दिया है।

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2018 से 2021: भाषा, सेंटर और व्यवस्था पर सवाल

NEET 2018 और 2019 में सबसे बड़ा विवाद प्रश्नपत्रों के अनुवाद को लेकर हुआ। तमिल और हिंदी माध्यम के छात्रों ने आरोप लगाया कि अंग्रेजी के मुकाबले क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्न कठिन और गलत अनुवाद वाले थे। इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट तक सुनवाई हुई और छात्रों को बोनस अंक देने की सिफारिश की गई। 2020 में कोविड-19 के बीच परीक्षा आयोजित कराने को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। कई राज्यों में परीक्षा स्थगित करने की मांग उठी, जबकि परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग के पालन में कमी की शिकायतें सामने आईं। वहीं 2021 में ड्रेस कोड को लेकर छात्राओं को रोके जाने और कई केंद्रों पर परीक्षा देर से शुरू होने जैसे मामले चर्चा में रहे।

2022-2023: पेपर लीक की आशंका और पारदर्शिता पर बहस

NEET 2022 में कुछ राज्यों से पेपर लीक की आशंका और गड़बड़ी के आरोप सामने आए। हालांकि बड़े स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। 2023 में भी परीक्षा केंद्रों के आवंटन, तकनीकी गड़बड़ियों और उत्तर कुंजी को लेकर विवाद देखने को मिले। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें दूर-दराज के केंद्र दिए गए, जिससे परीक्षा देने में कठिनाई हुई। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया कि परीक्षा संचालन में सुधार की जरूरत लगातार बनी हुई है।

2024: ग्रेस मार्क्स और रिजल्ट विवाद ने बढ़ाया संकट

NEET 2024 सबसे ज्यादा विवादित रहा। परीक्षा के बाद पेपर लीक के आरोप सामने आए और बिहार में गिरफ्तारियां भी हुईं। रिजल्ट जारी होने पर 67 छात्रों के टॉप करने और 718-719 जैसे असामान्य स्कोर ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। जांच में सामने आया कि करीब 1,500 से अधिक छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। इस मुद्दे पर देशभर में विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। बाद में ग्रेस मार्क्स रद्द कर कुछ छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी।

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2025-2026: तकनीकी गड़बड़ी से परीक्षा रद्द होने तक

2025 में NEET समेत अन्य परीक्षाओं में बायोमेट्रिक फेल होने, बिजली जाने और तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आईं। इससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल और गहरे हुए। अब 2026 में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई। लगातार सामने आ रहे विवादों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि NEET परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में न फंसे।

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