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पर्यावरण संरक्षण संविधान की जिम्मेदारी, गरीब-वंचित वर्ग पर इसके नुकसान का सीधा असर; NUSRL Ranchi में बोली SC की जज नागरत्ना

पर्यावरण संरक्षण संविधान की जिम्मेदारी, गरीब-वंचित वर्ग पर इसके नुकसान का सीधा असर; NUSRL Ranchi में बोली SC की जज नागरत्ना

रांची के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) में शनिवार को न्यायमूर्ति एस. बी. सिन्हा स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने पर्यावरण संरक्षण को संविधान से जुड़ी अनिवार्य जिम्मेदारी बताया।

पर्यावरणीय न्याय पर जोर, अदालतों की भूमिका अहम

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने “पर्यावरणीय न्याय एवं जलवायु परिवर्तन” विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय न्याय केवल नीतिगत मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संविधान की मूल भावना से जुड़ा हुआ है। अदालतों को संवैधानिक सिद्धांतों की व्याख्या के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सतत विकास, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, सावधानी सिद्धांत, पब्लिक ट्रस्ट सिद्धांत और अंतर-पीढ़ी समानता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालयों को भविष्य को ध्यान में रखते हुए और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए फैसले लेने चाहिए।

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जलवायु संकट पर चिंता, सामाजिक न्याय से जुड़ाव

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि पर्यावरणीय नुकसान का सबसे अधिक असर गरीब और वंचित वर्ग पर पड़ता है, इसलिए इसे सामाजिक न्याय से जोड़कर देखना जरूरी है। उन्होंने निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता को जरूरी बताया। वहीं, कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. एस. सोनक ने कहा कि प्रकृति के नियमों में अपील की व्यवस्था नहीं होती, वहां केवल परिणाम होते हैं। उन्होंने ग्लेशियर पिघलने, समुद्र स्तर बढ़ने और खाद्य असुरक्षा जैसे खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए चेतावनी दी कि इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्मृति व्याख्यान यूनिवर्सिटी का एकेडमिक इवेंट

कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. एन. प्रसाद सहित कई न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ और शिक्षाविद उपस्थित रहे। कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह स्मृति व्याख्यान विश्वविद्यालय का एक प्रमुख अकादमिक आयोजन बन चुका है। यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. बी. सिन्हा की स्मृति में आयोजित किया गया। अंत में अधिवक्ता इंदरजीत सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अन्य आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बना दिया।

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