Education Jharkhand

Edu Jharkhand Header
Breaking News
Top News
रामगढ़ के इस स्कूल में 7 साल से नहीं है पानी की सुविधा, स्टूडेंट्स घर से लाते हैं पानी, शौच के लिए भी बाहर जाते हैं बच्चे

रामगढ़ के इस स्कूल में 7 साल से नहीं है पानी की सुविधा, स्टूडेंट्स घर से लाते हैं पानी, शौच के लिए भी बाहर जाते हैं बच्चे

रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड की कोरांबे पंचायत स्थित मोहन बेड़ागांव के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में बीते सात वर्षों से पेयजल की सुविधा पूरी तरह ठप है। हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे बच्चे घर से बोतल में पानी भरकर स्कूल आने को मजबूर हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुनीता कुमारी प्रसाद ने बताया कि परिसर में चापानल के साथ जलमीनार का निर्माण कराया गया था, लेकिन आंधी में सोलर प्लेट क्षतिग्रस्त होने के बाद से अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। वर्ष 2019 में पीएचईडी विभाग को आवेदन देकर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई। शिक्षा विभाग और पीएचईडी की उदासीनता के कारण बच्चों और शिक्षकों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।

Read Also: झारखंड सरकार में 73 हजार से अधिक पद खाली, HRMS रिपोर्ट में खुलासा, स्वीकृत हैं 2.23 लाख पद

पानी के अभाव में बाहर जाना मजबूरी, पढ़ाई हो रही प्रभावित

विद्यालय में पानी नहीं होने के कारण बच्चों और शिक्षकों को शौच और अन्य जरूरतों के लिए बाहर जाना पड़ता है। जंगली क्षेत्र में स्थित इस स्कूल में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। प्रधानाध्यापिका के अनुसार जब तक बच्चे वापस नहीं लौटते, तब तक भय का माहौल बना रहता है। इससे पढ़ाई भी बाधित होती है और बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। अभिभावकों का कहना है कि अगर किसी बच्चे की बोतल से पानी गिर जाता है, तो उसे पूरे दिन प्यासा रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में छोटे बच्चों की सेहत पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।

Read Also: किताब-पेंसिल जितना जरूरी हो गया है कंप्यूटर, पर शिक्षक की भूमिका कभी कम नहीं होगी….AI को सहायक के रूप में देखें, विकल्प नहीं

मिड-डे मील के लिए कुएं से लाना पड़ता है पानी

विद्यालय में मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए भी अलग से पानी की व्यवस्था नहीं है। रसोइया को प्रतिदिन दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है, जिसके बाद भोजन तैयार होता है। भोजन के बाद बच्चों को उसी सीमित पानी से हाथ और बर्तन धुलवाए जाते हैं। अभिभावक दिनेश रजवार, विजय शंकर बेदिया, रामेश्वर रजवार और सुनील रजवार ने बताया कि शौच की स्थिति में बच्चों को तालाब या घर भेजना पड़ता है। वहीं, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुलोचना कुमारी ने कहा कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी। अब मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

————————————————————————————————————————

शिक्षा से जुड़ी हर बड़ी खबर, शिक्षा विभाग, यूनिवर्सिटी, कॉलेज-एडमिशन, परीक्षा और करियर अपडेट अब सीधे आपके मोबाइल पर। हमारे Education Jharkhand के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें और पाएं सबसे तेज और भरोसेमंद जानकारी।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *