नेतरहाट विद्यालय में एडमिशन के लिए 150 स्टूडेंट्स सेलेक्ट, 23 मार्च से शारीरिक जांच, पहली बार होगा साइक्लोजिकल टेस्ट
राज्य के प्रतिष्ठित आवासीय शिक्षण संस्थान नेतरहाट विद्यालय, लातेहार में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा छह में नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए 150 छात्रों को शारीरिक जांच और मनोवैज्ञानिक परीक्षण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। विद्यालय प्रबंधन ने इस संबंध में विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 23 मार्च से एक अप्रैल तक रांची के सदर अस्पताल में इन छात्रों की शारीरिक जांच की जाएगी।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि सभी छात्रों को तय तिथि पर ही जांच और परीक्षण के लिए उपस्थित होना अनिवार्य होगा। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के आधार पर चयनित इन छात्रों में से अंततः 100 छात्रों का औपबंधिक नामांकन किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुसार संपन्न की जाएगी, ताकि योग्य और सक्षम छात्रों का ही चयन सुनिश्चित हो सके।
शारीरिक जांच के साथ एज वेरिफिकेशन पर भी जोर
विद्यालय प्रशासन ने इस बार शारीरिक जांच के साथ-साथ आयु सत्यापन को भी विशेष महत्व दिया है। जांच के दौरान छात्रों के समग्र स्वास्थ्य परीक्षण के साथ उनकी आयु का भी सत्यापन किया जाएगा। पूर्व में कुछ मामलों में अधिक आयु के छात्रों द्वारा फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर नामांकन लेने की शिकायतें सामने आई थीं।
इसी को देखते हुए इस बार आयु जांच को अनिवार्य किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस कदम से नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगेगी। शारीरिक जांच में छात्रों की फिटनेस, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य आवश्यक मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि आवासीय विद्यालय के अनुशासन और दिनचर्या के अनुरूप छात्र पूरी तरह सक्षम हों।
साइक्लोजिकल टेस्ट से परखा जाएगा मानसिक संतुलन
नेतरहाट विद्यालय में इस बार पहली बार छात्रों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किया जाएगा। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि आवासीय विद्यालय में अध्ययन के लिए केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी सुदृढ़ होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस नई व्यवस्था को लागू किया गया है।
मनोवैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से छात्रों की मानसिक क्षमता, दबाव सहने की क्षमता और समायोजन कौशल का आकलन किया जाएगा। प्रबंधन के अनुसार, इससे ऐसे छात्रों का चयन किया जा सकेगा जो विद्यालय के कठोर शैक्षणिक और अनुशासित वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इस नई पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और आवश्यक कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में गुणवत्तापूर्ण परिणाम की उम्मीद की जा रही है।
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