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झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पारित : अब सीएम-गवर्नर मिल कर चुनेंगे वाइस चांसलर

झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पारित : अब सीएम-गवर्नर मिल कर चुनेंगे वाइस चांसलर

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को सदन की स्वीकृति मिल गई। इससे पहले गत वर्ष पारित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को कुछ बिंदुओं पर आपत्ति के बाद लोकभवन से वापस कर दिया गया था। सरकार ने उन आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए संशोधन कर नया विधेयक सदन के पटल पर रखा।

प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह राज्य में उच्च शिक्षा को अधिक कुशल, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा। विधेयक पर हुई विस्तृत चर्चा के दौरान पक्ष-विपक्ष के विधायकों ने अपने सुझाव रखे। धनबाद से विधायक राज सिन्हा ने इसे प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा। जिसका समर्थन अमित कुमार यादव ने किया। जबकि जयराम कुमार महतो ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई। हालांकि मंत्री ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक पूरी तरह परिपक्व है। इसमें पूर्व की सभी त्रुटियों को दूर कर लिया गया है। अंततः सदन की सहमति से विधेयक पारित कर दिया गया।

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सीएम-गवर्नर मिल कर चुनेंगे वाइस चांसलर

विधेयक में कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब कुलपति का चयन राज्यपाल और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से करेंगे, जो खोज समिति द्वारा भेजे गए पैनल में से किसी एक नाम का चयन करेंगे। इसके बाद राज्यपाल के माध्यम से औपचारिक नियुक्ति की जाएगी। यदि पैनल के किसी नाम पर सहमति नहीं बनती है, तो नया पैनल मंगाया जा सकेगा। इसके लिए चार सदस्यीय सर्च कमिटी गठित होगी, जिसमें एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद अध्यक्ष होंगे।

साथ ही किसी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्थान के प्रमुख, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रतिनिधि और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य होंगे। संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव समिति के सचिव होंगे, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। समिति तीन से पांच योग्य उम्मीदवारों के नाम बंद लिफाफे में वर्णमाला क्रम में भेजेगी, जिसमें किसी प्रकार की वरीयता नहीं दर्शाई जाएगी।

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समयसीमा, आयु सीमा और कार्यकाल से जुड़े प्रावधान तय

विधेयक में कुलपति नियुक्ति की समयसीमा भी स्पष्ट की गई है। चयन प्रक्रिया पद रिक्त होने से कम से कम छह माह पहले शुरू होगी और एक माह पहले पूरी कर ली जाएगी। कुलपति पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है। नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होगी।

जिसे मुख्यमंत्री के परामर्श से राज्यपाल संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में अधिकतम दो वर्ष तक बढ़ा सकते हैं, बशर्ते संबंधित व्यक्ति 70 वर्ष की आयु पूरी न कर चुका हो। इसके अलावा, एक ही विश्वविद्यालय में कार्यकाल विस्तार सहित पूरा करने के बाद पुनः नियुक्ति का प्रावधान नहीं होगा। इन प्रावधानों को उच्च शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

नए विधेयक में क्या प्रावधान…

  • कुलपति का चयन कुलाधिपति (राज्यपाल) और मुख्यमंत्री संयुक्त रूप से करेंगे।
  • चयन के लिए एक खोज समिति बनाई जाएगी।
  • समिति के अध्यक्ष कुलाधिपति द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद होंगे
  • राज्य सरकार केंद्रीय विवि के एक शिक्षाविद को सदस्य नामित करेगी
  • यूजीसी का प्रतिनिधि भी समिति में सदस्य होगा।
  • उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव सदस्य होंगे
  • संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव समिति के सचिव होंगे, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा।
  • समिति के सदस्यों का उस विवि या उससे जुड़े किसी कॉलेज से संबंध नहीं होगा।
  • कम से कम तीन मतदान वाले सदस्यों की उपस्थिति के बिना बैठक नहीं होगी
  • खोज समिति 3 से 5 नामों का पैनल तैयार करेगी। कुलाधिपति और मुख्यमंत्री इसी पैनल में से किसी एक नाम पर सहमति बनाकर कुलपति का चयन करेंगे। इसके बाद कुलाधिपति द्वारा औपचारिक नियुक्ति की जाएगी।
  • यदि अनुशंसित नामों में से किसी को भी चयनित नहीं किया जाता है, तो नई सूची मांगी जा सकती है।

जानिए…अब तक क्या हुआ था

  • वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक विधानसभा से पारित कर राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था।
  • राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस विधेयक को वापस भेजते हुए कई बिंदुओं पर गंभीर समीक्षा और विधि विभाग से राय लेने का निर्देश दिया था।
  • विधेयक में कुलपति, प्रतिकुलपति और वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल से हटाकर राज्य सरकार को देने का प्रावधान था।
  • विपक्ष ने इसे राज्यपाल के अधिकारों में कटौती बताया था, जबकि सरकार का तर्क था कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।

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