कोल्हान, डीएसपीएमयू, एसके मुर्मू, बीबीकेएमयू और जमशेदपुर महिला विवि में प्रोफेसर के सभी पद खाली
झारखंड के अधिकांश विश्वविद्यालयों में शिक्षकों को समय पर प्रमोशन नहीं मिलने का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। स्थिति यह है कि राज्य के पांच विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां प्रोफेसर के शत-प्रतिशत पद खाली हैं। कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा और जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में पिछले चार वर्षों से एक भी प्रोफेसर कार्यरत नहीं है।
इसी तरह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) रांची, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) धनबाद और सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका में भी फिलहाल कोई प्रोफेसर नहीं हैं। इसके अलावा राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में भी प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के करीब 95 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसका सीधा असर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों और शोध कार्यों पर पड़ रहा है।
20 वर्षों से एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर नहीं हुआ प्रमोशन
सूत्रों के अनुसार झारखंड के कई विश्वविद्यालयों में करीब 20 वर्षों से एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति नहीं हुई है। इसके कारण बड़ी संख्या में शिक्षक लंबे समय से एक ही पद पर कार्य कर रहे हैं। हालांकि अब झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) ने एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन वर्तमान में कार्यरत कई एसोसिएट प्रोफेसर अगले पांच से छह वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में यदि जल्द प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो विश्वविद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षकों की कमी और बढ़ सकती है।
राज्य के विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर
विश्वविद्यालय : स्वीकृत : कार्यरत
कोल्हान विवि, चाईबासा : 25 : 00
जमशेदपुर महिला विवि : 14 : 00
रांची विश्वविद्यालय, रांची : 47 : 01
बीबीएमकेयू, धनबाद : 21 : 00
डीएसपीएमयू, रांची : 20 : 00
विभावि, हजारीबाग : 21 : 01
सिदो कान्हू मुर्मू विवि, दुमका : 13 : 00
नोट : रांची विवि में अभी 2 प्रोफेसर हैं, लेकिन सृजित पद के विरुद्ध एक और दूसरे कालबद्ध के अनुरूप नियुक्त हैं।
वीसी बनने के लिए जरूरी है 10 वर्ष का प्रोफेसर अनुभव
यूजीसी विनियम 2018 और झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2000 के अनुसार किसी भी विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए प्रतिष्ठित शिक्षाविद होना आवश्यक है। इसके साथ ही किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए तथा आयु 65 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
लेकिन राज्य के विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की कमी के कारण स्थानीय शिक्षकों के लिए कुलपति या प्रति-कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए पात्रता पूरी करना मुश्किल हो रहा है। रांची विश्वविद्यालय और विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में भी प्रोफेसर के केवल एक-एक पद ही भरे हुए हैं।
बाहरी कुलपतियों की नियुक्ति पर उठ रहे सवाल
हाल ही में 10 मार्च को कुलाधिपति सह राज्यपाल की ओर से तीन विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई। इसके तहत डॉ. ईला कुमार को जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, प्रो. राजीव मनोहर को डीएसपीएमयू और अभय कुमार सिंह को झारखंड राज्य मुक्त विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया। इन नियुक्तियों के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में बाहरी कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने विधानसभा के बजट सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए पूछा कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में कुलपति पद के लिए बाहरी लोगों की नियुक्ति क्यों की जा रही है, क्या राज्य में योग्य शिक्षाविदों की कमी है। वहीं शिक्षाविदों का कहना है कि यदि शिक्षकों को समय पर प्रमोशन मिले तो राज्य के कई शिक्षक कुलपति पद के लिए पात्र हो सकते हैं।
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