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झारखंड में नर्सिंग कॉलेजों के लिए सख्त नियम लागू: स्थायी भवन, ऑनलाइन एनओसी, बायोमेट्रिक और सीसीटीवी अनिवार्य

झारखंड में नर्सिंग कॉलेजों के लिए सख्त नियम लागू: स्थायी भवन, ऑनलाइन एनओसी, बायोमेट्रिक और सीसीटीवी अनिवार्य

राज्य में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। विभाग में नर्सिंग संस्थानों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने से संबंधित निष्पादन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की। इसमें डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव सीमा कुमारी उदयपुरी, उपसचिव ध्रुव प्रसाद सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में राज्य के 61 नर्सिंग कॉलेजों द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए दिए गए आवेदनों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने इन संस्थानों की वर्तमान स्थिति, दस्तावेजों और आधारभूत सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि परिषद की बैठक 15 दिनों के भीतर आयोजित कर योग्य पाए जाने वाले संस्थानों को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

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जमीन, भवन और आधारभूत सुविधाओं की होगी विस्तृत जांच

बैठक के दौरान नर्सिंग कॉलेजों की आधारभूत सुविधाओं की स्थिति पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों से पूछा कि संबंधित कॉलेज अपनी जमीन पर संचालित हो रहे हैं या लीज अथवा किराये की व्यवस्था पर चल रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि संस्थानों के पास कितनी जमीन उपलब्ध है।

भवन में कितने कमरे तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों के लिए जमीन की रसीद और शहरी क्षेत्रों में संचालित संस्थानों के लिए होल्डिंग टैक्स की स्थिति की भी जांच करने का निर्देश दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि संस्थानों के बुनियादी ढांचे की पूरी पड़ताल कर ही आगे की अनुमति दी जाएगी।

किराये या लीज पर चल रहे कॉलेजों पर विशेष सख्ती

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जिन कॉलेजों को पहले ही स्थायी भवन निर्माण के लिए अवसर दिया गया था, उन्हें अब तक अपना भवन तैयार कर लेना चाहिए था। ऐसे मामलों में लीज या किराये की व्यवस्था के नवीनीकरण की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्थान लगातार नियमों का पालन नहीं कर रहा है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार अब ऐसे कॉलेजों पर विशेष नजर रखी जाएगी जो लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था में संचालित हो रहे हैं और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

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नियम उल्लंघन पर जुर्माना और निलंबन की चेतावनी

बैठक में नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान तय किया गया। विभाग ने विभिन्न प्रकार की कमियों के आधार पर जुर्माने की राशि निर्धारित की है। पहली बार उल्लंघन पर 25 हजार रुपये, दूसरी बार 50 हजार रुपये और तीसरी बार एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर संस्थान को निलंबित किया जा सकता है।

अपर मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि अब अनापत्ति प्रमाणपत्र से संबंधित पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी और ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सभी कॉलेजों को फैकल्टी की जानकारी ऑनलाइन प्रदर्शित करने, बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने और परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी निर्देश दिया गया है।

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