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17 मई को होगी जेईई एडवांस्ड : सफल होने के लिए प्रायोरिटी लिस्ट में रखें ये टॉपिक्स, समझें जेईई मेन और एडवांस्ड के फर्क

17 मई को होगी जेईई एडवांस्ड : सफल होने के लिए प्रायोरिटी लिस्ट में रखें ये टॉपिक्स, समझें जेईई मेन और एडवांस्ड के फर्क

आईआईटी रूड़की ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा का सिलेबस आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। इसके साथ ही देश के लाखों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों की तैयारी को स्पष्ट दिशा मिल गई है। जेईई एडवांस्ड की परीक्षा 17 मई को आयोजित की जाएगी, लेकिन इसमें बैठने के लिए छात्रों को पहले जेईई मेन क्वालिफाई करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अभ्यर्थियों को सीबीएसई या संबंधित स्टेट बोर्ड की 12वीं परीक्षा में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक भी हासिल करने होंगे।

दरअसल, जेईई एडवांस्ड, जेईई मेन और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं का सिलेबस मूल रूप से एक ही आधार पर टिका है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स – तीनों विषयों का सिलेबस एनसीईआरटी की पुस्तकों पर आधारित होता है। फर्क सिर्फ पेपर पैटर्न और प्रश्नों की गहराई में होता है। यही कारण है कि जेईई एडवांस्ड को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। इसमें सवालों की अवधारणात्मक समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और समय प्रबंधन की कड़ी परीक्षा होती है।

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सिलेबस में नहीं हुआ कोई बदलाव

आईआईटी रूड़की की ओर से जारी सिलेबस में पिछले वर्ष की तुलना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी जो सिलेबस पिछले साल लागू था, वही इस साल भी मान्य रहेगा। इससे उन छात्रों को राहत मिली है, जो पहले से ही तय पैटर्न के अनुसार तैयारी कर रहे थे। वहीं जेईई मेन परीक्षा का आयोजन 21 जनवरी से 30 जनवरी के बीच किया जाएगा। जेईई मेन के प्रदर्शन के आधार पर ही छात्रों को जेईई एडवांस्ड में शामिल होने का मौका मिलेगा। दैनिक भास्कर में छपे जेईई एक्सपर्ट कल्पित वीरवाल का मानना है कि सिलेबस पहले से तय होने के कारण अब छात्रों को रणनीति और अभ्यास पर पूरा फोकस करना चाहिए। सही योजना और एनसीईआरटी आधारित मजबूत तैयारी ही आईआईटी में दाखिले का रास्ता आसान बना सकती है।

तैयारी के समय इन पांच स्टेप्स को फॉलो करें‎

  • एनसीईआरटी मददगार : एनसीईआरटी की‎ बुक्स से ही पढ़ाई करें। मदद के लिए अन्य‎स्टडी मेटेरियल उपयोग किया जा सकता है।‎
  • शॉर्ट नोट्स बनाए : जो शॉर्ट नोट्स क्लास ‎में बनाए हैं, उनसे ही रिवीजन करें।‎ खासकर फॉर्मूलों को शॉर्ट नोट्स के जरिए‎ही याद करें।‎
  • मुश्किल टॉपिक शुरू नहीं करें : कुछ नया‎ पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। खासकर ‎मुश्किल टॉपिक्स शुरू नहीं करें। मुश्किल‎ टॉपिक्स समझ में नहीं आने से‎ आत्मविश्वास कम होगा।‎
  • पुराने सवाल हल करें : अधिक से अधिक‎मॉक टेस्ट दें और पुराने सवालों के पेपर को‎हल करें।‎
  • एग्जाम शिफ्ट के अनुसार करें प्रैक्टिस :‎उस समय प्रैक्टिस करें, जिस समय आपका‎ एग्जाम होगा।‎

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प्रायोरिटी लिस्ट में रखें ये टॉपिक्स

केमिस्ट्री में फिजिकल और‎ऑर्गेनिक केमिस्ट्री सबसे महत्वपूर्ण‎

केमिस्ट्री में फिजिकल केमिस्ट्री‎(थर्मोडायनामिक्स, इक्विलिब्रियम,‎इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री) और ऑर्गेनिक‎केमिस्ट्री-II (फिनॉल्स, अमाइन्स आदि‎से अधिक सवाल आए थे। फिजिकल‎केमिस्ट्री का वेटेज 29 और आर्गेनिक‎केमिस्ट्री का अंक भर करीब 28 फीसदी‎ रहा था।

फिजिक्स सेक्शन में मैकेनिक्स‎का औसत वेटेज 38 प्रतिशत‎

एडवांस्ड में मैकेनिक्स (सेंटर ऑफ मास,‎न्यूटन लॉज), इलेक्ट्रिसिटी एंड मैग्नेटिज्म‎(इलेक्ट्रोस्टैटिक्स, करंट इलेक्ट्रिसिटी,‎ईएमआई) और मॉडर्न फिजिक्स से सबसे‎ज्यादा प्रश्न आते हैं। पिछले वर्षों में‎मैकेनिक्स का 38% तक वेटेज रहा,‎जबकि इलेक्ट्रिसिटी से 18% तक के सवाल पूछे गए।‎

मैथ्स सेक्शन में कैलकुलस और ‎प्रोबेबिलिटी पर अधिक फोकस

एडवांस्ड के मैथ्स के सेक्शन में में‎इंटीग्रल कैलकुलस (19 प्रतिशत),‎मैट्रिक्स एंड डिटर्मिनेंट्स (8 प्रतिशत),‎प्रोबेबिलिटी (14 प्रतिशत) और‎कोऑर्डिनेट जियोमेट्री से सबसे ज्यादा‎प्रश्न आए। कॉम्प्लेक्स नंबर्स और‎वेक्टर्स/3D जियोमेट्री भी हाई वेटेज‎(9-11 प्रतिशत) वाले रहे।‎

जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में ये हैं तीन बड़े अंतर‎

  • मेन के सवाल ट्रिकी नहीं : मेन में सवाल‎ट्रिकी नहीं होते हैं। सवाल मेमोरी और‎फॉर्मूला आधारित होते हैं। एडवांस्ड में मात्र‎15 से 20 सवाल ही सीधे होते हैं। अन्य‎सवालों की भाषा ट्रिकी होती है। सवालों की‎लंबाई मेन के सवालों से अधिक होती है।‎
  • मेन में स्पीड जरूरी : जेईई मेन को क्रैक‎करने के लिए छात्रों को सवालों को हल‎करने के लिए अधिक स्पीड हासिल करनी‎होती है। एडवांस्ड में पुराने सालों के पेपर हल‎ करके और अधिक मॉक देने होते हैं। छात्रों‎ को अपनी रीडिंग हैबिट भी सुधारनी होती है।‎
  • एडवांस्ड के लिए रीडिंग हैबिट सुधारें : मेन में सवालों का स्तर आसान होता है। मेन के सवाल‎जल्द हल किए जा सकते हैं। एडवांस्ड में सवालों का उत्तर धीरज व सयंम से देना होता है। एक‎सवाल को दो से अधिक बार भी पढ़ना होता है। एडवांस्ड में टाइम मैनेजमेंट जरूरी है।‎

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