IIM-R में Executive Ph.D बैच शुरू, निदेशक बोले- संस्थान में हर साल 170-180 शोध पत्र प्रकाशित, मजबूत रिसर्च संस्कृति की है पहचान
आईआईएम रांची में Executive Ph.D. बैच 2025 का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अनुभवी प्रोफेशनल्स की एक नई डॉक्टोरल यात्रा की शुरुआत हुई। उद्घाटन कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से जुड़े प्रोफेसरों, वर्तमान शोधार्थियों और आईआईएम रांची समुदाय के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का उद्देश्य नए शोधार्थियों को अकादमिक वातावरण से परिचित कराना और आगे की शोध प्रक्रिया की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत करना रहा।
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कार्यक्रम की संरचना और शोध संस्कृति पर जोर
डॉक्टोरल प्रोग्राम एवं रिसर्च के चेयरपर्सन प्रो. मनीष बंसल ने नए शोधार्थियों का स्वागत करते हुए चयन प्रक्रिया को कठोर और पारदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि यह बैच बैंकिंग, शिक्षा, सामाजिक क्षेत्र, सरकारी विभागों, पीएसयू और नियामक संस्थाओं से आए अनुभवी प्रोफेशनल्स का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे आपसी सीखने की मजबूत संभावना बनती है।
उन्होंने Executive Ph.D. कार्यक्रम की पुनर्गठित संरचना की जानकारी दी, जिसमें तीन टर्म का कोर्सवर्क, कैंपस इमर्शन, समग्र परीक्षा, एडवाइजरी कमेटी का गठन, शोध प्रस्ताव सेमिनार, प्रकाशन आवश्यकताएं और आंतरिक व बाहरी थीसिस डिफेंस शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने साप्ताहिक फैकल्टी रिसर्च सेमिनार, रिसर्च मेथड वर्कशॉप और डॉक्टोरल रिसर्च कॉन्फ्रेंस जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।
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अनुभव, आत्मविश्वास और वैश्विक दृष्टिकोण पर संदेश
कार्यक्रम में 2022 बैच के Executive Ph.D. स्कॉलर्स अखिल शर्मा और शिखर दुआ ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ अकादमिक अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी। यूके की कील यूनिवर्सिटी के प्रो. अभिषेक बहल और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के प्रो. अबरार अली सैयद ने शोध के दौरान सहयोग मांगने, आलोचना स्वीकार करने और सीखने की निरंतरता पर बल दिया।
आईआईएम रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने संस्थान की मजबूत शोध संस्कृति की जानकारी देते हुए बताया कि यहां हर साल 170 से 180 शोध पत्र प्रकाशित होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या उच्च गुणवत्ता वाली पत्रिकाओं में होती है। मुख्य अतिथि प्रो. विकास कुमार ने Ph.D. को जीवन बदलने वाली यात्रा बताते हुए कहा कि धैर्य, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। कार्यक्रम का समापन नए शोधार्थियों को आत्मविश्वास और संयम के साथ आगे बढ़ने के संदेश के साथ हुआ।
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