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पश्चिमी सिंहभूम के तीन कॉलेजों का आठ साल बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, प्रोफेसर हैं पर उनके विषय की पढ़ाई ही नहीं होती

पश्चिमी सिंहभूम के तीन कॉलेजों का आठ साल बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, प्रोफेसर हैं पर उनके विषय की पढ़ाई ही नहीं होती

पश्चिमी सिंहभूम जिले में उच्च शिक्षा की स्थिति आज भी चिंताजनक है। कोल्हान विश्वविद्यालय के अधीन 2017 में जिले के तीन प्रखंडों – जगन्नाथपुर, मंझगांव और मनीहारीपुर में नए डिग्री कॉलेज खोले गए थे। उद्देश्य था कि ग्रामीण इलाकों के छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा मिल सके। लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी इन कॉलेजों की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी भवन, लैब और शिक्षकों की नियुक्ति जैसी मूलभूत सुविधाएं अब तक अधूरी हैं।

प्रोफेसर इंचार्ज के विषय की क्लासेस ही नहीं चलती

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन प्रोफेसरों को कॉलेजों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनके अपने विषय की ही पढ़ाई कॉलेज में नहीं होती। जगन्नाथपुर डिग्री कॉलेज में करीब 1200 छात्र नामांकित हैं, लेकिन यहां विज्ञान की पढ़ाई नहीं होती। जबकि कॉलेज के प्रोफेसर इंचार्ज भौतिकी विषय के हैं। मंझगांव कॉलेज की स्थिति भी इससे अलग नहीं। वहां अभी तक कॉलेज का स्थायी भवन ही तैयार नहीं हुआ है, और कक्षाएं अस्थायी भवनों में चल रही हैं।

वहीं मनीहारीपुर कॉलेज में विज्ञान विषय की पढ़ाई शुरू तो होनी थी, लेकिन प्रयोगशाला, उपकरण और शिक्षकों की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा। इन कॉलेजों में पढ़ाई से ज्यादा समय प्रशासनिक कामों में बीत जाता है। छात्र भी अब परेशान हैं और कई दूसरे कॉलेजों की ओर रुख कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय की अनदेखी जारी

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बार-बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे कॉलेजों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. अशोक कुमार झा ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षक आधुनिक पद्धति से पढ़ाने को तैयार हैं, लेकिन संसाधनों की भारी कमी है। कंप्यूटर, लैब और कक्षाओं की अनुपलब्धता में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल है। आठ साल बाद भी कॉलेजों में अपने विषय की पढ़ाई शुरू न होना उच्च शिक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब शिक्षक अपने विषय की कक्षा ही न ले सकें, तो छात्रों का भविष्य कैसा बनेगा। यह सोचने का समय अब प्रशासन को ही तय करना होगा।

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