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1910 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, CM हेमंत बोले- पहले साल में खींची लंबी लकीर, नौ हजार से ज्यादा नियुक्तियां

1910 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, CM हेमंत बोले- पहले साल में खींची लंबी लकीर, नौ हजार से ज्यादा नियुक्तियां

झारखंड के युवाओं के लिए नए साल की शुरुआत खुशखबरी के साथ हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में जेएसएससी द्वारा आयोजित झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (सीजीएल) के माध्यम से चयनित 1910 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। लंबे इंतजार, कानूनी अड़चनों और प्रक्रियाओं के बाद आखिरकार चयनित युवाओं को सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिला। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं मंच से 26 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी, उनके परिजन और गणमान्य लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे। सरकार ने इसे नववर्ष का उपहार बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भी नियुक्ति प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि युवाओं को समय पर रोजगार मिल सके।

पहले साल में खींची लंबी लकीर, नौ हजार से ज्यादा नियुक्तियां

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार के पहले ही साल में नौ हजार से अधिक नौजवानों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय का नजारा आज भी याद है, जब बड़ी संख्या में लोग नियुक्ति समारोह में जुटे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कहने से ज्यादा करने में विश्वास रखती है। सारी नियुक्तियां चुन-चुनकर, पारदर्शी तरीके से की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों को उनके संघर्ष की याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने साजिश रची और कोर्ट-कचहरी के नाम पर चंदा तक वसूला गया। मुख्यमंत्री ने सख्त शब्दों में कहा कि भविष्य में इस तरह का काम करने वालों को सीधे जेल भेजा जाएगा और ऐसे कृत्य दोबारा बर्दाश्त नहीं होंगे।

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झारखंड को बताया शांति और रोजगार का राज्य

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में न तो रोजगार मिला और न ही नौकरी दी गई। इसके उलट मौजूदा सरकार हर वर्ग के लिए लगातार नियुक्तियां कर रही है और आगे भी कई भर्तियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास झारखंड के हजारों करोड़ रुपये बकाया हैं।

इसके बावजूद राज्य अपने संसाधनों से युवाओं को अवसर दे रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जहां-जहां विपक्ष की सरकारें हैं, वहां त्योहारों के समय उन्माद फैलता है, जबकि झारखंड शांति, सौहार्द और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। युवा आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

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विज्ञापन से नियुक्ति तक विवादों की कहानी

यह परीक्षा लंबे समय तक विवादों में रही थी। सीजीएल परीक्षा का सफर 28 दिसंबर 2015 को विज्ञापन जारी होने के साथ शुरू हुआ था। उस समय आवेदन शुल्क एक हजार रुपए रखा गया था। ठीक एक साल बाद 21 अगस्त 2016 को प्रारंभिक परीक्षा हुई और अक्टूबर में परिणाम भी जारी कर दिया गया, लेकिन मुख्य परीक्षा नहीं हो सकी। कारण था टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल पदों को एक साथ जोड़ देना।

इसी मुद्दे को लेकर जनार्दन शर्मा नामक अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे। सिंगल बेंच ने छात्र के पक्ष में फैसला देते हुए दोनों श्रेणियों का रिजल्ट अलग-अलग प्रकाशित करने का आदेश दिया। सरकार इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच गई, जहां सिंगल बेंच का आदेश रद्द कर दिया गया। इसके बाद छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां सुनवाई से इनकार कर दिया गया। दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई, जिसमें कहा गया कि नियमावली की गलती सरकार की है, छात्रों की नहीं, लेकिन कोर्ट ने इस पर भी सुनवाई नहीं की। अंततः सरकार ने पूरा विज्ञापन ही वापस ले लिया।

आरक्षण, नियमावली और पेपर लीक ने बढ़ाई परेशानी

साल 2017 में फिर से आवेदन लिए गए और परीक्षा 2018 में कराने की घोषणा हुई। इस बार पदों की संख्या बढ़ाई गई, लेकिन तारीख बदलकर 2019 के नवंबर-दिसंबर कर दी गई। तब भी परीक्षा नहीं हो सकी, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 100 प्रतिशत आरक्षण झारखंडवासियों के लिए लागू कर दिया। बाद में यह फैसला वापस लिया गया। नई सरकार बनने के बाद 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया।

नई नियमावली बनी, लेकिन 2022 में रमेश हांसदा बनाम राज्य सरकार केस में हाईकोर्ट से सरकार को झटका लगा और पूरी वैकेंसी रद्द करनी पड़ी। उसी साल फिर आवेदन बुलाए गए और परीक्षा की तारीख कई बार बदली गई। 2024 में 21 और 28 जनवरी को परीक्षा हुई, लेकिन पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई। अगस्त-सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा हुई, जिस पर फिर पेपर लीक और नियमों में भेदभाव के आरोप लगे।

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